अालसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम्।
अधनस्य कुतो मित्रम् अमित्रस्य कुतो सुखम्।।
अर्थात्- जो लोग आलसी हैं, उन्हें ज्ञान कैसे प्राप्त होगा? यदि ज्ञान नहीं होगा तो धन कैसे मिलेगा? यदि धन नहीं होगा तो कोई मित्रता क्यों करेगा? और मित्र नहीं होंगे तो सुख का अनुभव कैसे होगा? अत: आलस्य छोड़ देना चाहिए।
अधनस्य कुतो मित्रम् अमित्रस्य कुतो सुखम्।।
अर्थात्- जो लोग आलसी हैं, उन्हें ज्ञान कैसे प्राप्त होगा? यदि ज्ञान नहीं होगा तो धन कैसे मिलेगा? यदि धन नहीं होगा तो कोई मित्रता क्यों करेगा? और मित्र नहीं होंगे तो सुख का अनुभव कैसे होगा? अत: आलस्य छोड़ देना चाहिए।
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